
मरकाटोला की दर्दनाक घटना के बाद भी थमी नहीं भालुओं की दस्तक, गोविंदपुर से सरंगपाल तक रिहायशी इलाकों में लगातार नजर आ रहे जंगली भालू
कांकेर। जंगल और इंसानी बस्तियों के बीच की दूरी जैसे-जैसे कम होती जा रही है, कांकेर में मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। अगस्त महीने में भालू के हमले में दो लोगों की मौत और एक महिला के घायल होने की घटना के बाद अब रिहायशी इलाकों में भालुओं की लगातार मौजूदगी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में शहर और आसपास के इलाकों में भालुओं के घरों और कॉलोनियों तक पहुंचने की कई घटनाएं सामने आई हैं।
सबसे ताजा मामला गोविंदपुर इलाके का है, जहां गुरुवार देर रात दो भालू एक घर के भीतर तक पहुंच गए। दोनों भालू सीधे किचन में घुस गए और वहां रखी चीजों को टटोलने लगे। इसी दौरान बर्तन गिरने की आवाज से घर में सो रहे लोगों की नींद खुल गई। जब परिवार ने किचन की ओर देखा तो सामने भालुओं को देखकर उनके होश उड़ गए।
आवाज सुनकर खुली नींद, सामने दिखा भालू
रात के सन्नाटे में बर्तनों के गिरने की आवाज ने परिवार को जगा दिया। शुरुआत में लोगों को किसी जानवर के होने का अंदेशा था, लेकिन किचन में नजर पड़ते ही स्थिति साफ हो गई। घर के अंदर दो भालू मौजूद थे।
परिवार ने घबराकर बाहर निकलने के बजाय खुद को सुरक्षित कमरे में बंद कर लिया। इस दौरान भालू कुछ समय तक घर के भीतर घूमते रहे और बाद में बाहर निकल गए। स्थानीय लोगों के मुताबिक, भालुओं के घर के भीतर तक पहुंचने की घटना ने पूरे इलाके में डर का माहौल पैदा कर दिया है।
सरंगपाल की रामेश्वरम कॉलोनी में भी दिखे भालू
गोविंदपुर के अलावा सरंगपाल की रामेश्वरम कॉलोनी में भी रात करीब दो बजे दो भालुओं की मौजूदगी देखी गई। ग्रामीणों ने इसका वीडियो भी बनाया। राहत की बात रही कि इस दौरान भालुओं का किसी व्यक्ति से आमना-सामना नहीं हुआ।
यह पहली बार नहीं है जब कांकेर के रिहायशी हिस्सों में भालुओं की आवाजाही सामने आई हो। इससे पहले अलबेलापारा वार्ड में भी दो भालुओं के घर के मुख्य गेट से अंदर आने और बाहर निकलने का वीडियो सामने आया था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से साफ है कि भालुओं की गतिविधि अब केवल जंगल की सीमा तक सीमित नहीं रह गई है।
5 अगस्त की घटना ने बढ़ाई चिंता
भालुओं की मौजूदा गतिविधियों के बीच 5 अगस्त की मरकाटोला-लारगांव की घटना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नरहरपुर वन परिक्षेत्र में मादा भालू के हमले में एक भाई और उसकी बहन की मौत हो गई थी, जबकि उन्हें बचाने पहुंची एक अन्य बहन गंभीर रूप से घायल हुई थी। घटना के बाद इलाके में भारी दहशत फैल गई थी।
बाद में वन विभाग की कार्रवाई में हमलावर मादा भालू को पकड़कर इलाज के लिए रायपुर भेजा गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में उसके रेबीज संक्रमित होने की पुष्टि हुई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी उठाई थी।
सिर्फ रेस्क्यू नहीं, स्थायी समाधान की मांग
अब गोविंदपुर और आसपास के इलाकों में लोगों की चिंता सिर्फ इस बात को लेकर नहीं है कि अगली बार भालू कहां दिखाई देगा, बल्कि सवाल यह है कि उन्हें बार-बार आबादी तक पहुंचने से कैसे रोका जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय घरों और गलियों में भालुओं की मौजूदगी ने सामान्य जीवन प्रभावित किया है। लोगों को डर है कि यदि किसी रात भालू और इंसान का आमना-सामना हो गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
वन विभाग का कहना है कि शहर के वार्डों और आसपास के गांवों में रात के समय गश्त बढ़ाई गई है। सूचना मिलने पर टीम मौके पर पहुंच रही है और भालुओं को आबादी से दूर जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जंगल और बस्ती के बीच बढ़ता टकराव
कांकेर में हाल की घटनाओं को अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखने के बजाय एक बड़े सवाल से जोड़कर देखने की जरूरत है। जब जंगली जानवर लगातार भोजन और पानी की तलाश में मानव बस्तियों के नजदीक पहुंचने लगें और इंसानों के घर तक उनका प्रवेश होने लगे, तो यह केवल वन्यजीव की मौजूदगी नहीं बल्कि बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष का संकेत है।
कांकेर में पिछले कुछ सप्ताह की घटनाएं इसी खतरे की ओर इशारा कर रही हैं। मरकाटोला की जानलेवा घटना के बाद रिहायशी इलाकों में लगातार भालुओं का दिखना स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के लिए भी चुनौती है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या हर बार भालू के आबादी में आने के बाद उसे जंगल की ओर खदेड़ना ही समाधान रहेगा, या कांकेर में मानव और वन्यजीव के बीच बढ़ते टकराव को रोकने के लिए कोई दीर्घकालिक रणनीति भी तैयार की जाएगी?
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