
- जयपुर में आशुतोष रांका पर हमला
- सीजेपी टीम पर हमला
- स्कूल निरीक्षण करने पहुंची CJP टीम
- आशुतोष रांका के साथ धक्का-मुक्की
- गाड़ियों के शीशे तोड़ने का आरोप
- महिला कार्यकर्ताओं से बदसलूकी का आरोप
- भाजपा कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप
- रामपुरा कंवरपुरा स्कूल विवाद
- जयपुर स्कूल निरीक्षण विवाद
- राजस्थान में सरकारी स्कूल की बदहाली
- आशुतोष रांका हमला मामला
- CJP और भाजपा विवाद
- जयपुर की ताजा खबर
- राजस्थान की ताजा खबर
रामपुरा-कंवरपुरा में स्कूल की बदहाली देखने पहुंची थी CJP टीम, ग्रामीणों से विवाद के बाद दोनों पक्षों की FIR; CJP के 48 घण्टे अल्टीमेटम के बाद सरकार ने अब नए स्कूल भवन को दी मंजूरी

जयपुर, राजस्थान। राजस्थान की राजधानी जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में सरकारी स्कूल के निरीक्षण को लेकर शुक्रवार, 21 अगस्त को शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। स्कूलों की जमीनी स्थिति देखने के लिए चलाए जा रहे ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत CJP की टीम यहां पहुंची थी। टीम में CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सह-संयोजक आशुतोष रांका भी शामिल थे।
निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों के विरोध के बाद स्थिति बिगड़ गई। CJP की ओर से आरोप लगाया गया कि टीम के सदस्यों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, पत्थर फेंके गए तथा उनकी गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए। रांका ने यह भी आरोप लगाया कि टीम में शामिल महिला कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी की गई। हालांकि, इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है और घटना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों की ओर से भी CJP के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है।
स्कूल की हालत देखने पहुंचे थे CJP कार्यकर्ता
CJP की टीम रामपुरा-कंवरपुरा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय की स्थिति का जायजा लेने पहुंची थी। रिपोर्टों के मुताबिक, स्कूल भवन को पहले ही जर्जर और असुरक्षित घोषित किया जा चुका था। इसके बाद विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी, जिसमें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कमरों और टिन शेड का इस्तेमाल किया जा रहा था। कुछ रिपोर्टों में स्कूल के संचालन के लिए पशुशाला/भैंसों के बाड़े जैसी जगह के इस्तेमाल का भी उल्लेख है।
CJP का कहना है कि उसका ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत टीम राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में स्कूलों का निरीक्षण कर रही है।
निरीक्षण से पहले ही विरोध, फिर बढ़ा विवाद
शुक्रवार को टीम के गांव पहुंचने के बाद स्थानीय लोगों ने उनके स्कूल जाने का विरोध किया। घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और रास्ते को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी। प्रत्यक्षदर्शियों और सामने आए वीडियो से जुड़े समाचारों के अनुसार, इसके बाद CJP कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच धक्का-मुक्की हुई और टीम को वहां से वापस जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
CJP का आरोप है कि विरोध महज ग्रामीणों तक सीमित नहीं था और इसमें भाजपा से जुड़े लोग भी शामिल थे। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि हमले के दौरान कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट हुई, वाहनों को निशाना बनाया गया और पत्थरबाजी की गई। आशुतोष रांका ने अपने कपड़े फाड़े जाने का भी आरोप लगाया।
महिला कार्यकर्ताओं से बदसलूकी का भी आरोप
घटना के बाद आशुतोष रांका और CJP की ओर से यह गंभीर आरोप लगाया गया कि टीम में मौजूद महिलाओं के साथ भी बदसलूकी और धक्का-मुक्की की गई। कुछ रिपोर्टों में महिला कार्यकर्ताओं पर मिट्टी फेंके जाने और उन्हें भीड़ द्वारा पीछे धकेले जाने का उल्लेख है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी पुलिस जांच से होना बाकी है।
CJP ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
घटना के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और आशुतोष रांका ने हमले के पीछे भाजपा से जुड़े लोगों के होने का आरोप लगाया। रांका ने बाद में इसे सुनियोजित हमला बताते हुए दावा किया कि कुछ लोग उनके पहुंचने से पहले स्थानीय भाजपा विधायक कैलाश वर्मा से मिले थे।
हालांकि, यह आरोप अभी जांच के दायरे में है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कैलाश वर्मा ने आरोपों को खारिज करते हुए CJP पर गांव का माहौल खराब करने और बिना अनुमति स्कूल में जाने का आरोप लगाया है।
शिक्षा मंत्री को 48 घंटे का अल्टीमेटम
घटना के बाद आशुतोष रांका ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया। CJP ने मांग की है कि कथित हमले में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की जाए और सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश से जुड़े हालिया आदेश को वापस लिया जाए।
रांका ने कार्रवाई नहीं होने पर राजस्थान में व्यापक आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। CJP ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
पुलिस ने क्या कहा?
घटना के बाद पुलिस ने मामले को एकतरफा मानने के बजाय दोनों पक्षों की शिकायतों पर अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। जयपुर दक्षिण के DCP राजर्षि राज वर्मा के अनुसार, CJP की ओर से मारपीट और आपराधिक धमकी सहित आरोप लगाए गए हैं, जबकि दूसरी तरफ से भी CJP सदस्यों के खिलाफ शिकायत दी गई है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा की ओर से आरोपों का खंडन
भाजपा की ओर से CJP के इस दावे को खारिज किया गया है कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने सुनियोजित तरीके से हमला कराया। स्थानीय स्तर पर भाजपा नेताओं और ग्रामीणों का कहना है कि CJP टीम के आने से गांव में तनाव पैदा हुआ और स्कूल में निरीक्षण को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी थी। इस पक्ष के अनुसार, स्कूल की मरम्मत के लिए पहले से सरकारी स्तर पर प्रक्रिया चल रही थी।
यानी फिलहाल इस पूरे मामले में एक तरफ CJP की ओर से भाजपा समर्थकों पर हमला करने के आरोप हैं, तो दूसरी तरफ ग्रामीणों और स्थानीय भाजपा पक्ष की ओर से CJP पर माहौल बिगाड़ने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही हमले की जिम्मेदारी और आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
विवाद के बीच सरकार का बड़ा फैसला
घटना के अगले दिन मामले में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक विकास सामने आया। राजस्थान सरकार ने रामपुरा-कंवरपुरा के सरकारी स्कूल के लिए नए भवन के निर्माण का आदेश जारी कर दिया है। नए भवन का निर्माण 1 सितंबर 2026 से शुरू करने की योजना बताई गई है।
सरकारी आदेश के अनुसार, स्कूल भवन के लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट से 12 लाख रुपये और विधायक निधि से 6 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यानी कुल 18 लाख रुपये की राशि नए भवन के लिए निर्धारित की गई है।
सरकार ने इसके साथ राजस्थान के सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए करीब 12,500 करोड़ रुपये के तीन वर्षीय रोडमैप की भी जानकारी दी है। सरकार के मुताबिक राज्य में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनकी अपनी इमारत नहीं है।
अब असली सवाल—स्कूल ठीक होगा या विवाद यहीं तक रहेगा?
रामपुरा-कंवरपुरा की घटना ने एक साथ दो सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला, सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति क्या है और बच्चों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक माहौल में पढ़ाई की सुविधा कब मिलेगी? दूसरा, किसी सार्वजनिक संस्था या राजनीतिक संगठन की टीम जब सरकारी संस्थानों की स्थिति देखने पहुंचे तो स्थानीय स्तर पर विरोध और टकराव की स्थिति क्यों पैदा हुई?
फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच कर रही है। वहीं सरकार ने स्कूल के लिए नया भवन स्वीकृत कर दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि हमले के आरोपों पर पुलिस क्या कार्रवाई करती है और नए स्कूल भवन का काम वास्तव में तय समय पर शुरू होता है या नहीं।
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