FIR वापसी पर फिर घमासान, CJP ने केंद्र पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप; 5 सितंबर को दिल्ली में नए मार्च का ऐलान

नई दिल्ली। छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। 25 जुलाई को सरकार के साथ हुए कथित समझौते के बावजूद FIR वापस लेने और अन्य आश्वासनों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए CJP ने अब दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाने का ऐलान किया है।

CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास लगातार सरकार से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की स्थिति स्पष्ट करने और संबंधित FIR वापस लेने की मांग उठा रहे हैं। 18 अगस्त को भी उन्होंने सवाल उठाया था कि जब सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित FIR की सूची उपलब्ध कराने की बात कही है, तो सरकार अदालत के सामने सूची पेश करने में हिचक क्यों रही है।

25 जुलाई के आश्वासन को लेकर आमने-सामने सरकार और CJP

CJP का कहना है कि 25 जुलाई को आंदोलन वापस लेने के दौरान सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा देने और NEET विवाद से प्रभावित परिवारों के लिए राहत जैसे मुद्दों पर आश्वासन दिया गया था।

CJP के मुताबिक, इन्हीं आश्वासनों के आधार पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन को उस समय स्थगित किया गया था। लेकिन संगठन का आरोप है कि बाद में इन वादों को लागू करने की दिशा में अपेक्षित गति नहीं दिखाई गई।

23 अगस्त को CJP ने फिर सरकार पर युवाओं से किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया और कहा कि राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में आंदोलन के अगले चरण पर फैसला लिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद FIR का मुद्दा और पेचीदा हुआ

FIR विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ तत्काल जबरन कार्रवाई पर रोक लगाई थी। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह सुरक्षा उन लोगों पर लागू नहीं होगी जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि के आरोप हैं।

इसके बाद 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति को और स्पष्ट करते हुए कहा कि दिल्ली समेत राज्य सरकारें कानून के अनुसार प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR बंद या वापस ले सकती हैं, लेकिन गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े मामलों को इससे अलग रखा जा सकता है।

यही बिंदु मौजूदा विवाद का सबसे अहम हिस्सा है। इसलिए यह कहना कि देशभर में दर्ज हर FIR स्वतः खत्म हो गई है या सरकार ने बिना किसी शर्त के सभी FIR वापस लेने का अंतिम आदेश जारी कर दिया है, उपलब्ध जानकारी के आधार पर सही नहीं होगा।

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अब 5 सितंबर को दिल्ली में जुटेंगे CJP समर्थक

24 अगस्त के ताजा बयान में CJP ने कहा कि सरकार की ओर से 25 जुलाई के आश्वासनों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण राष्ट्रीय कार्यसमिति ने शांतिपूर्ण लामबंदी दोबारा शुरू करने का फैसला किया है।

संगठन ने 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण युवा मार्च निकालने की घोषणा की है। CJP के अनुसार मार्च में NEET से जुड़े मृत छात्रों के परिवारों और पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोगों की भागीदारी भी प्रस्तावित है।

इससे पहले CJP ने 23 अगस्त को ही संकेत दिया था कि यदि सरकार लंबित आश्वासनों पर आगे नहीं बढ़ती है तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन फिर शुरू किया जा सकता है।

सौरव दास का सवाल—FIR की सूची अदालत में क्यों नहीं?

सौरव दास ने 18 अगस्त को सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यदि अदालत संबंधित मामलों की सूची मांग रही है तो उसे उपलब्ध कराने में देरी क्यों की जा रही है। उनका तर्क है कि जिन लोगों पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं, उनके मामलों को अलग रखा जा सकता है, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के मामलों को उसी आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।

CJP का आरोप है कि सरकार की ओर से की जा रही देरी से 25 जुलाई को दिए गए आश्वासनों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। संगठन ने यह भी संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे पर आगे भी सरकार पर दबाव बनाएगा।

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क्या सरकार ने वाकई सभी FIR वापस लेने का फैसला किया?

CJP का दावा है कि 25 जुलाई को सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने का आश्वासन दिया था। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट के बाद के आदेशों में राज्यों को कानून के मुताबिक FIR वापस लेने या बंद करने की अनुमति दी गई है, लेकिन गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े मामलों को अलग रखा गया है।

इसलिए मौजूदा स्थिति को “सभी FIR वापस हो चुकी हैं” के बजाय “FIR वापसी को लेकर सरकार और CJP के बीच गतिरोध जारी है” कहना अधिक तथ्यपरक होगा।

आंदोलन के अगले चरण पर सबकी नजर

अब 5 सितंबर का प्रस्तावित दिल्ली मार्च इस विवाद को नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम दे सकता है। एक तरफ CJP सरकार से 25 जुलाई के कथित आश्वासनों को लागू करने की मांग कर रही है, वहीं दूसरी तरफ FIR के मामलों में अदालत के निर्देशों और गंभीर आपराधिक मामलों के अपवाद को लेकर कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केंद्र और संबंधित राज्य सरकारें प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों पर कोई स्पष्ट कार्रवाई करेंगी, या CJP का आंदोलन एक बार फिर देशव्यापी रूप लेगा?

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