
शिक्षा और रोजगार के आंकड़ों ने बढ़ाई चर्चा, पंजाब सरकार ने इसे सरकारी व्यवस्था पर बढ़ते भरोसे का संकेत बताया
चंडीगढ़। पंजाब में सरकारी स्कूलों और रोजगार के मोर्चे पर सामने आए कुछ आंकड़े इन दिनों चर्चा में हैं। राज्य सरकार के अनुसार वर्ष 2022 के बाद करीब 3.64 लाख विद्यार्थियों ने निजी स्कूलों से निकलकर सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। इसी अवधि में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों का मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में प्रदर्शन भी बेहतर हुआ है।
2026 में पंजाब के सरकारी स्कूलों से 882 विद्यार्थियों ने NEET-UG क्वालिफाई किया, जबकि 2021 में यह संख्या करीब 80 बताई गई थी। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े इन आंकड़ों को राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में आए बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
निजी से सरकारी स्कूलों की ओर क्यों बढ़ा रुझान?

पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने 19 अगस्त 2026 को विधानसभा में बताया कि पिछले कुछ वर्षों में 3.64 लाख विद्यार्थी निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों में आए हैं।
सरकार इस बदलाव को सरकारी स्कूलों में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और शिक्षा के माहौल में सुधार से जोड़ रही है।
सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल सुविधाएं, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष तैयारी और करियर काउंसलिंग जैसे कार्यक्रमों पर जोर दिया गया है।
अगर निजी स्कूल से सरकारी स्कूल में आने वाले विद्यार्थियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो यह इस बात का संकेत माना जा सकता है कि कुछ परिवार सरकारी शिक्षा व्यवस्था को पहले की तुलना में अधिक भरोसेमंद विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
NEET में 882 सरकारी स्कूल विद्यार्थियों की सफलता
पंजाब के सरकारी स्कूलों की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में इस वर्ष का NEET परिणाम शामिल है। 2026 में 882 सरकारी स्कूल विद्यार्थियों के NEET-UG क्वालिफाई करने की जानकारी सामने आई है। स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टों ने भी इस आंकड़े को रिपोर्ट किया है।
सरकार के अनुसार 2021 में सरकारी स्कूलों से NEET क्वालिफाई करने वाले विद्यार्थियों की संख्या करीब 80 थी। इस लिहाज से पांच वर्षों के भीतर यह आंकड़ा कई गुना बढ़ा है।
इस बदलाव में PACE जैसे प्रतियोगी परीक्षा तैयारी कार्यक्रमों की भूमिका बताई जा रही है। इन कार्यक्रमों के तहत सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अतिरिक्त कक्षाएं, टेस्ट और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।
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सिर्फ NEET नहीं, JEE पर भी जोर
सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को पंजाब सरकार अपनी शिक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बता रही है।
सरकार के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों से NEET के साथ-साथ JEE में भी सैकड़ों विद्यार्थी सफल हुए हैं।
इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में निजी कोचिंग संस्थानों का दबदबा माना जाता है। ऐसे में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को स्कूल स्तर पर तैयारी का अवसर मिलना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए उपयोगी हो सकता है।
रोजगार के मोर्चे पर भी बड़ा आंकड़ा

शिक्षा के अलावा रोजगार के क्षेत्र में भी पंजाब सरकार ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का बड़ा आंकड़ा पेश किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के अनुसार सरकार के कार्यकाल में 68 हजार से अधिक सरकारी नियुक्तियां की जा चुकी हैं। सरकार का कहना है कि इन भर्तियों में योग्यता और पारदर्शी चयन प्रक्रिया पर जोर दिया गया।
विभागवार आंकड़ों में शिक्षा, पंजाब पुलिस, बिजली, स्वास्थ्य और स्थानीय निकाय जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नियुक्तियां शामिल होने की बात कही गई है। युवाओं के लिए सरकारी नौकरी हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहा है। ऐसे में नियुक्तियों की संख्या पंजाब सरकार के प्रदर्शन का महत्वपूर्ण पैमाना बन गई है।
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आम आदमी क्लीनिक और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

पंजाब में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को भी सरकार अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिनाती है। जुलाई 2026 तक राज्य में 1,090 आम आदमी क्लीनिक होने की जानकारी सामने आई थी। इन केंद्रों के जरिए सामान्य बीमारियों की जांच, दवाएं और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत भी लाखों स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जाने और कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है।
क्या ये आंकड़े पूरे पंजाब की तस्वीर बदलने के लिए पर्याप्त हैं?
पंजाब सरकार के सामने उपलब्धियों के साथ चुनौतियां भी हैं। सरकारी स्कूलों में खाली पद, शिक्षा की गुणवत्ता, रोजगार की स्थिरता और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता जैसे मुद्दों पर लगातार निगरानी जरूरी है। फिर भी यदि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने और NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों की सफलता को एक साथ देखा जाए, तो यह पंजाब की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में आए बदलाव का महत्वपूर्ण संकेत जरूर है।
पंजाब मॉडल पर दूसरे राज्यों की नजर
पंजाब में शिक्षा, रोजगार और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अपनाई गई नीतियों पर दूसरे राज्यों में भी चर्चा हो रही है। खासकर सरकारी स्कूलों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और निजी स्कूलों से विद्यार्थियों के सरकारी स्कूलों में आने का आंकड़ा दूसरे राज्यों के लिए भी अध्ययन का विषय हो सकता है। हालांकि किसी भी राज्य के मॉडल को दूसरे राज्य में लागू करने से पहले स्थानीय परिस्थितियों, बजट, शिक्षक उपलब्धता और प्रशासनिक ढांचे का अध्ययन जरूरी होगा।
Ground Talks की पड़ताल
पंजाब के मौजूदा आंकड़े एक दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं—सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि, NEET में 882 विद्यार्थियों की सफलता और 68 हजार से अधिक सरकारी नियुक्तियां। इन आंकड़ों को सरकार की उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि ये बदलाव आने वाले वर्षों में कितने स्थायी साबित होते हैं और आम परिवारों को शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य के स्तर पर इसका कितना प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।
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