
रायगढ़/पुसौर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर भारतीय जनता पार्टी देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के जरिए सेवा और जनसंपर्क का संदेश दे रही है। 17 सितंबर से शुरू हुआ यह अभियान एक महीने तक चलने वाला है। लेकिन इसी बीच छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के पुसौर नगर पंचायत से भाजपा के भीतर नाराजगी का मामला सामने आया है, जहां 8 भाजपा पार्षदों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए जिला भाजपा अध्यक्ष को आवेदन सौंपने की जानकारी सामने आई है।
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इस्तीफे के आवेदन में पार्षदों ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों को लेकर गंभीर असंतोष जताया है। पार्षदों के अनुसार उनके वार्डों में पानी, बिजली, सड़क और नाली जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़े काम अपेक्षित तरीके से नहीं हो पा रहे हैं। पार्षद निधि से प्रस्तावित और स्वीकृत कार्यों की गति को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं। एक तरफ सेवा का संकल्प, दूसरी तरफ अपने ही पार्षदों की नाराजगी, यही पूरा घटनाक्रम भाजपा की स्थानीय स्तर की कार्यशैली और जनप्रतिनिधियों के साथ संगठनात्मक समन्वय को लेकर सवाल खड़े करता है।
जब पार्टी देशभर में ‘सेवा ही संकल्प’ और जनसेवा का संदेश दे रही है, उसी समय उसके ही निर्वाचित पार्षद यदि अपने वार्डों में मूलभूत विकास कार्यों को लेकर नाराजगी जताते हुए सामूहिक रूप से इस्तीफा देने की स्थिति में पहुंचते हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है—
क्या पार्टी का ‘सेवा संकल्प’ स्थानीय स्तर पर भी उसी प्रभावी तरीके से दिखाई दे रहा है? क्या जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को समय रहते सुना गया? क्या पानी, सड़क, बिजली और नाली जैसी मूलभूत समस्याओं को लेकर कोई ठोस समीक्षा हुई? और सबसे बड़ा सवाल—यदि पार्टी के ही निर्वाचित पार्षद विकास कार्यों को लेकर असंतोष जता रहे हैं, तो इसकी जवाबदेही आखिर किसकी है?
भाजपा संगठन के सामने अब चुनौती पुसौर नगर पंचायत में कुल 15 निर्वाचित पद हैं और 8 भाजपा पार्षदों की ओर से सामने आया यह घटनाक्रम स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इस्तीफे स्वीकार हुए हैं या नहीं, इसका अंतिम निर्णय संगठन स्तर पर होना बाकी है। ऐसे में अब निगाहें भाजपा संगठन के अगले कदम पर हैं। क्या नाराज पार्षदों से बातचीत होगी? क्या उनके लगाए गए विकास संबंधी आरोपों की जांच होगी? और क्या नगर पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जाएगी?
क्योंकि सवाल सिर्फ 8 पार्षदों के इस्तीफे का नहीं है… सवाल उस ‘सेवा संकल्प’ का भी है, जिसका संदेश आज पूरे देश में दिया जा रहा है।